
छत्तीसगढ़ में सावन अमावस्या के अवसर पर हरेली का लोकपर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया । बता दे कि प्रदेश के पहले और प्रमुख लोकपर्व के रूप में पहचाने जाने वाला हरेली त्योहार खेती-किसानी, प्रकृति और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ होने के कारण गांव से लेकर शहर तक लोग हरेली के रंग में रंगे नजर आए । इस दौरान खेती-किसानी में उपयोग होने वाले पारंपरिक औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। रापा, कुदारी, सब्बल सहित अन्य कृषि उपकरणों को सजाकर पूजा की गई। किसान के लिए ये औजार महज उपकरण नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, आजीविका और खेत से उसके गहरे रिश्ते का प्रतीक हैं। घर के दरवाजों पर नीम की पत्तियां लगाई गईं और चौखट को पारंपरिक तरीके से सजाया गया। लोकमान्यता के अनुसार नीम की पत्तियां नकारात्मकता और बीमारियों से बचाव का प्रतीक मानी जाती हैं।

वही हरेली के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास में भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं की शानदार झलक देखने को मिली।
हरेली पर्व की सबसे खास पहचान गेड़ी भी इस आयोजन में आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों से लेकर बड़ों तक ने गेड़ी चढ़कर उत्सव का आनंद लिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी गेड़ी चढ़कर हरेली का उत्सव मनाया। इस दौरान मौजूद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और खुशनुमा बना दिया। भूपेश बघेल के साथ जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों ने छत्तीसगढ़ी गीत गाए और दोहा लगाकर लोकपर्व की खुशियां साझा कीं।





