
बिलासपुर (10 अगस्त 2026) :- श्रावण माह के पावन द्वितीय सोमवार के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा मंत्री, मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक तथा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी के बिलासपुर नर्मदानगर स्थित, निवास पर भगवान शिव का भव्य रुद्राभिषेक (रुद्री पाठ) वैदिक विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर वर्णित 21 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा कर्मकांड एवं सनातन परंपरा के अनुरूप भगवान आशुतोष का अभिषेक कराया गया।विधिवत शास्त्रोक्त रुद्राभिषेक पश्चात डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने सपरिवार सभी ब्राह्मणों का यथोपचार सम्मान कर आशीर्वाद लिया साथ ही श्री शिव पुराण भी भेंट किया। जहां रुद्राभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों एवं रुद्र पाठ से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा वही डॉ. बांधी ने सपरिवार महादेव का पूजन-अर्चन कर क्षेत्र, एवं समस्त जनमानस के सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

“कर्मकांड केवल परंपरा नहीं, जीवन को सद्मार्ग दिखाने वाली आध्यात्मिक प्रेरणा है ” — डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी
रुद्राभिषेक के अवसर पर डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा कि वैदिक कर्मकांड केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि उसमें निहित आध्यात्मिक चेतना मानव जीवन को दिशा देने वाली जीवनोपयोगी शक्ति है। उन्होंने उपस्थित आचार्यगण से आग्रह किया कि आप सभी प्रतिभाशाली युवा होने के साथ वैदिक कर्मकांड में दक्ष हैं, इसलिए कर्मकांड के उद्देश्य, आध्यात्मिक महत्व एवं जीवनोपयोगिता को सरल भाषा में जनमानस तक पहुंचाते हुए लोगों को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति की सार्थकता तभी है, जब उसकी मूल भावना नई पीढ़ी और समाज तक पहुंचे। धार्मिक परंपराओं के उद्देश्य को समझकर जीवन में आत्मसात किया जाना परम आवश्यक है। सनातन संस्कृति का उद्देश्य मानव जीवन को संस्कारित, सदाचारी बनाना है। जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का यह पुनीत कार्य निरंतर आगे बढ़ता रहे जिससे समाज एवं राष्ट्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो।

श्रावण मास के विशिष्ट मुहूर्त में आयोजित भगवान शिव का यह रुद्राभिषेक विशेष पुण्यदायी……आचार्य श्रीरंग
इस अवसर भागवताचार्य पं. श्रीप्रकाश तिवारी ‘श्रीरंग’, ने बताया कि श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस पावन मास में भगवान शिव के निमित्त किया गया प्रत्येक पूजन, जप, अभिषेक एवं वैदिक अनुष्ठान शास्त्रों में विशेष आध्यात्मिक एवं शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है। इसी शास्त्रीय एवं आध्यात्मिक भावना के साथ श्रावण मास के द्वितीय सोमवार को प्रदोष काल में आर्द्रा नक्षत्र के संयोग में यह वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न हुआ है। आर्द्रा नक्षत्र के अधिदेवता स्वयं भगवान रुद्र हैं, जो भगवान शिव के तेजस्वी स्वरूप माने जाते हैं। ऐसे में रुद्रपाठ के वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ इस विशेष काल में आयोजित श्री रुद्राभिषेक अपने आप में अत्यंत पुण्यदायी, आध्यात्मिक एवं परम मंगलकारी है।

इस अवसर पर मानस मर्मज्ञ सुश्री अनसुईया तिवारी, पं रामनाथ महराज, पं. दिलीप पांडेय, पं प्रकाश मिश्रा, पं प्रकाश तिवारी, पं बसंत शुक्ला, पं मयंक त्रिपाठी, पं. विनोद शर्मा (धरदेई) पं संतोष मिश्रा, पं विनोद शर्मा (खैरा), सहित क्षेत्र के तमाम वैदिक विद्वानो कि गरिमामयी उपस्थित रही।





