
13 साल पुराने सरकारी पत्र से शुरू हुआ मामला आयोग तक पहुँचा;
41 अभ्यर्थियों की डिग्री पर सवाल,
RTI में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं,
दूसरी ओर राजभवन के निर्देशों पर विश्वविद्यालय का जवाब लंबित।
कुलसचिव की नियुक्ति सहित उनसे जुड़े नए डिग्री विवाद ने भी बढ़ाई हलचल।
रायपुर/बिलासपुर: डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, करगी रोड-कोटा, बिलासपुर से जुड़ा B.Lib. डिग्री मान्यता का पुराना मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वर्ष 2013 में जिला पंचायत बिलासपुर द्वारा विश्वविद्यालय से 41 अभ्यर्थियों की B.Lib. डिग्री की मान्यता के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। लेकिन लगभग 13 वर्ष बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जवाब में जिला पंचायत ने संबंधित जानकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने की बात कही है। पुराने सरकारी पत्र और नए RTI उत्तर के बीच सामने आए इस अंतर ने पूरे प्रकरण को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है। इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, रायपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है। आयोग ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय से तथ्यात्मक प्रतिवेदन भी मांगा लेकिन विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत पहला जवाब आयोग की अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया। आयोग ने अपने 26 अक्टूबर 2026 के पत्र में स्पष्ट किया कि “विश्वविद्यालय द्वारा दी गई जानकारी शिकायत में उल्लिखित विषय से संबंधित नहीं है।” वहीं प्रतिवेदन उपकुलसचिव के हस्ताक्षर से प्रस्तुत किए जाने पर आयोग ने इसे नियम विरुद्ध मानते हुए आपत्ति दर्ज किया है और विश्वविद्यालय के कुलसचिव को शिकायत से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी पुनः प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की जवाबदेही और पुराने अभिलेखों की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है 13 साल पुराना B.Lib. डिग्री विवाद?
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, 27 अप्रैल 2013 को जिला पंचायत बिलासपुर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र क्रमांक 303/जि.पं./शिक्षा स्था./2013-14 जारी किया गया था। पत्र में जिला पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत शिक्षक पंचायत-ग्रंथपाल पद की भर्ती प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए बताया गया था कि विज्ञापित पद हेतु आवेदन करने वाले 41 अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय से B.Lib. की अंकसूची एवं डिग्री संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इनमें से कुछ अभ्यर्थियों द्वारा विश्वविद्यालय से जारी प्रमाणपत्रों की मान्यता पर आपत्ति जताई गई थी। जिला पंचायत ने विश्वविद्यालय से B.Lib. पाठ्यक्रम की मान्यता के संबंध में जानकारी मांगी थी।किंतु इस पुराने पत्र के लगभग 13 वर्ष बाद, जब कोटा निवासी आवेदक रितेश मिश्रा ने 24 जुलाई 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित जानकारी चाही, तब जिला पंचायत कार्यालय बिलासपुर ने 10 अगस्त 2026 को अपने जवाब में बताया कि मांगी गई जानकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं है तथा कार्यालय द्वारा B.Lib. की कोई भर्ती नहीं की गई है।यहीं से पूरे प्रकरण में सवाल खड़े होने लगे। वर्ष 2013 में जिला पंचायत द्वारा विश्वविद्यालय से आधिकारिक रूप से जानकारी मांगे जाने का पत्र मौजूद है, जबकि वर्ष 2026 के RTI उत्तर में संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। ज्ञात हो कि हमारे न्यूज चैनल द्वारा पूर्व में भी इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए समाचार प्रकाशित किया गया था। अब ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि उस समय विश्वविद्यालय से क्या जानकारी प्राप्त हुई थी, संबंधित अभिलेखों की वर्तमान स्थिति क्या है और 41 अभ्यर्थियों की B.Lib. डिग्री की मान्यता से जुड़े तथ्यों का आधिकारिक रिकॉर्ड आखिर कहां है?
शिकायत पहुँची निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग तक
इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता रितेश मिश्रा ने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, रायपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत में वर्ष 2013 के जिला पंचायत पत्र, 2026 के RTI उत्तर तथा विश्वविद्यालय से संबंधित दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए मामले की जांच और विश्वविद्यालय प्रबंधन से जवाब तलब करने की मांग की गई।आयोग ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 25 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र जारी कर शिकायत से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी/प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, विश्वविद्यालय को शिकायत की प्रति संलग्न कर निर्धारित समय-सीमा में तथ्यात्मक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया था। इस कार्रवाई से स्पष्ट हुआ कि शिकायत पर आयोग ने औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।

विश्वविद्यालय का जवाब शिकायत से हटकर, आयोग ने जताई आपत्ति
आयोग के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय ने पत्र क्रमांक 435/सी.बी.आर.यू./2026, दिनांक 5 अक्टूबर 2026 के माध्यम से अपना जवाब प्रस्तुत किया।लेकिन आयोग के 26 अक्टूबर 2026 के पत्र में विश्वविद्यालय के इस जवाब पर महत्वपूर्ण आपत्ति दर्ज करते हुए उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा दी गई जानकारी शिकायत-पत्र में उल्लिखित शिकायत से संबंधित नहीं है।इतना ही नहीं, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी उपकुलसचिव के हस्ताक्षर से प्रस्तुत की गई है, जो नियमों के अनुरूप नहीं है। आयोग के निर्देशानुसार प्रतिवेदन कुलसचिव के हस्ताक्षर से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। आयोग ने अपने पत्र में आगे निर्देशित किया है कि शिकायत से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी/प्रतिवेदन पुनः प्रस्तुत किया जाए तथा विश्वविद्यालय द्वारा भेजे जाने वाले पत्र पर कुलसचिव के हस्ताक्षर सुनिश्चित किए जाएं।अर्थात, विश्वविद्यालय का पहला जवाब आयोग की मूल शिकायत के समाधान के लिए पर्याप्त नहीं पाया गया और अब विश्वविद्यालय को पुनः जवाब देना है।

कुलसचिव की नियुक्ति को लेकर राजभवन में दर्ज है शिकायत
विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद केवल B.Lib. डिग्री मान्यता के मामले तक सीमित नहीं हैं। प्राप्त जानकारी और अभिलेखों के अनुसार, वर्तमान कुलसचिव अरविंद तिवारी की नियुक्ति के संबंध में राजभवन में शिकायत की जा चुकी है, जिसमें कुलसचिव की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान कुलसचिव के पद पर आने से पूर्व, वर्ष 2021 में विश्वविद्यालय में ही कार्यरत एक महिला द्वारा तत्कालीन कुलसचिव गौरव शुक्ला और वर्तमान कुलसचिव अरविंद तिवारी के विरुद्ध यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं।इस संबंध में राजभवन द्वारा विश्वविद्यालय को बार-बार जवाब प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किए जाने के बावजूद अब तक जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता के अनुसार, राजभवन के लगातार निर्देशों के बाद भी जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाना गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़े करता है।इस मामले में राजभवन और आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायतों तथा जारी पत्रों की स्थिति भी अब महत्वपूर्ण हो गई है। विश्वविद्यालय की ओर से संबंधित जवाब प्रस्तुत किए जाने और शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
कुलसचिव के पत्नी की डिग्री भी सुर्खियों में
इसी बीच, कुछ दिनों पूर्व वर्तमान कुलसचिव की पत्नी की डिग्री को लेकर भी संदेह जताते हुए संयुक्त शिक्षा संचालक के समक्ष शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह शिकायत न केवल सुर्खियों में है बल्कि एक ऐसा नया घटनाक्रम है, जिसके तथ्यों और दस्तावेजों की जांच संबंधित विभाग द्वारा किया जाना अपेक्षित है। हालांकि, अभी उक्त शिकायत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।ऐसे में विश्वविद्यालय से जुड़े अलग-अलग डिग्री प्रकरणों, नियुक्ति संबंधी शिकायतों और आयोग तथा राजभवन के समक्ष लंबित जवाबों ने गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है।
आयोग की भूमिका और निष्पक्ष जांच पर भी उठे सवाल
अब सवाल न केवल 13 साल पुराने B.Lib. प्रकरण और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली तक बल्कि नियामकीय संस्था की भूमिका और जवाबदेही पर भी उठने लगे हैं। जब आयोग द्वारा शिकायत से संबंधित तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगे जाने के बावजूद विश्वविद्यालय निर्धारित विषय से हटकर पृथक जानकारी प्रस्तुत करता है, तो क्या यह आयोग के निर्देशों की अवहेलना नहीं है? विश्वविद्यालय द्वारा इतने समय अंतराल के बाद भी शिकायत के मूल बिंदुओं पर जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने के बावजूद आखिर विश्वविद्यालय को बार-बार अवसर प्रदान किए जाने का औचित्य क्या है?
वहीं, राजभवन के समक्ष पूर्व में प्रस्तुत शिकायतों पर विश्वविद्यालय का जवाब अब तक लंबित रहने और आयोग के समक्ष भी असंबद्ध प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद संबंधित विश्वविद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं? क्या नियामकीय संस्था की जिम्मेदारी केवल पत्र जारी कर जवाब मांगने तक सीमित है, या फिर नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही तय करना भी उसके दायित्व का हिस्सा है? आखिर ऐसी कौन-सी प्रशासनिक विवशता है, जिसके चलते विश्वविद्यालय को बार-बार समय प्रदान किया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता वर्षों से संबंधित अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है?ए⁹ क्या आयोग इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करते हुए विश्वविद्यालय की जवाबदेही तय करेगा, या फिर यह मामला भी पत्राचार और समय-सीमा के विस्तार के बीच उलझकर रह जाएगा? फिलहाल अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय की जवाबदेही और आयोग की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। जो आगे चलकर स्पष्ट होगा।
टीप: उपरोक्त समाचार से संबंधित समस्त दस्तावेज RK NEWS 24 के पास उपलब्ध है।





