
रायपुर/ बिलासपुर :- कोई भी निजी विश्वविद्यालय भले ही स्ववित्त पोषित संस्थान हों, लेकिन उनका संचालन राज्य सरकार द्वारा अधिनियमित कानूनों एवं नियामकीय व्यवस्था के अधीन होता है साथ ही ऐसे संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे राजभवन, नियामक आयोग एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों द्वारा मांगी गई जानकारी का समयबद्ध एवं तथ्यात्मक उत्तर प्रस्तुत करें। किंतु इसके विपरीत न्यायधानी बिलासपुर के करगीरोड कोटा में संचालित डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, से जुड़े एक मामले में सामने आए शासकीय पत्राचार एवं आरटीआई दस्तावेज़ ने कई गंभीर प्रश्न खड़े दिए हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, राजभवन द्वारा गंभीर विषय की शिकायत के संबंध में विश्वविद्यालय से दो बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद विश्वविद्यालय की ओर से अब तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ, जबकि दूसरी ओर छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग भी पिछले दो माह से मामले को प्रक्रियाधीन बता रहा है। ऐसे में निजी विश्वविद्यालयों की जवाबदेही एवं नियामकीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर स्वाभाविक रूप से गंभीर बहस शुरू हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
अप्रैल 2026 में करगीरोड-कोटा, बिलासपुर निवासी भवानी शंकर (विजय) ने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव डॉ. अरविंद तिवारी के विरुद्ध राजभवन, छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग एवं उच्च शिक्षा विभाग सहित अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष विस्तृत लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी जिसमें प्रभारी कुलसचिव के विरुद्ध महिला यौन उत्पीड़न से संबंधित एक आपराधिक प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद उनके पद पर बने रहने, विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली एवं कुछ प्रशासनिक निर्णयों पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई थी।शिकायत प्राप्त होने के बाद राजभवन एवं अन्य संबंधित विभागों द्वारा विश्वविद्यालय से तथ्यात्मक जानकारी एवं प्रतिवेदन मांगे गए। वहीं छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने भी मामले को संज्ञान में लेकर विश्वविद्यालय से जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ की।संबंधित शिकायत पर जांच एवं कार्यवाही के विषय में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से करगीरोड कोटा निवासी रितेश मिश्रा, करगी रोड- ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत राजभवन एवं छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग से जानकारी मांगी। आवेदन में शिकायत पर हुई कार्रवाई, विश्वविद्यालय को भेजे गए पत्र, विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत जवाब तथा संपूर्ण पत्राचार की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था।

राजभवन का जवाब: रिकॉर्ड उपलब्ध, लेकिन विश्वविद्यालय से उत्तर नहीं……
आरटीआई के जवाब में राजभवन ने आवेदक को पहले सूचित किया कि संबंधित प्रकरण से जुड़े सात पृष्ठों के अभिलेख उपलब्ध हैं तथा निर्धारित शुल्क ₹14 जमा करने पर उनकी प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करा दी जाएंगी। इसके बाद प्राप्त नवीन पत्र में राजभवन ने यह भी अवगत कराया कि इस प्रकरण में विश्वविद्यालय से दो बार जानकारी मांगी गई, किंतु विश्वविद्यालय की ओर से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि शिकायत पर जानकारी प्राप्त करने के लिए राजभवन स्तर से भी औपचारिक प्रयास किए गए है।

आयोग ने RTI विश्वविद्यालय को भेजी, बाद में बताया – जांच प्रक्रियाधीन
दूसरी ओर, 22 जून 2026 को छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आरटीआई आवेदन डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया।बाद में 27 जुलाई 2026 को आयोग ने पत्र जारी कर बताया कि शिकायत शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकरण पर जांच एवं कार्रवाई अभी प्रक्रियाधीन है तथा कार्रवाई पूर्ण होने के बाद सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।

यह कोई नया नहीं पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला……
आरटीआई आवेदक रितेश मिश्रा का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार इससे पूर्व भी सी व्ही रमन विश्वविद्यालय से जुड़े कई मामलों में आयोग ने सूचना उपलब्ध कराने के बजाय आवेदन संबंधित विश्वविद्यालय को ही हस्तांतरित कर दिया था। बाद में विश्वविद्यालय ने स्वयं को स्ववित्तपोषित संस्था बताते हुए सूचना देने से इंकार कर दिया।
आयोग के भीतर से भी उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जब RK न्यूज 24 ने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, तब नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर आयोग के एक कर्मचारी ने दावा किया कि आयोग द्वारा भेजे गए आरटीआई संबंधी पत्रों का जवाब राज्य के अधिकांश निजी विश्वविद्यालय उपलब्ध करा देते हैं, किंतु डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के संबंध में कई मामलों में अपेक्षित जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती। हालांकि इस दावे की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
‘‘A’ ग्रेड का दावा, लेकिन जवाबदेही पर उठे सवाल
डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय करगीरोड कोटा जहां एक ओर स्वयं को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से ‘A’ ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय के रूप में प्रस्तुत करता है। वही दूसरी ओर यह पूरा घटनाक्रम कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है। यदि राजभवन द्वारा दो-दो बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद विश्वविद्यालय उत्तर प्रस्तुत नहीं करता और दूसरी ओर विनियामक आयोग भी लंबे समय से प्रकरण को प्रक्रियाधीन बताता है, तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि क्या एक उच्च ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय से नियामकीय संस्थाओं के प्रति अधिक जवाबदेही की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए?
उठ रहे हैं कई गंभीर प्रश्न…….
यदि राजभवन द्वारा दो बार जानकारी मांगे जाने के बाद भी विश्वविद्यालय उत्तर प्रस्तुत नहीं करता, तो उसके बाद क्या कार्रवाई की जाती है?
यदि विनियामक आयोग के समक्ष भी यही स्थिति है, तो क्या आयोग ने विश्वविद्यालय की जवाबदेही तय करने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाया?
यदि राजभवन के पास इस प्रकरण के अभिलेख उपलब्ध हैं, तो क्या विनियामक आयोग के पास भी उनका समुचित रिकॉर्ड होना चाहिए?
यदि कोई निजी विश्वविद्यालय नियामकीय संस्थाओं द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराता, तो क्या उसके लिए कोई उत्तरदायित्व या वैधानिक परिणाम निर्धारित हैं?
नियामकीय व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि राजभवन द्वारा दो बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद उत्तर प्राप्त नहीं होता है और विनियामक आयोग भी लंबे समय तक जांच को प्रक्रियाधीन बताता रहता है, तो ऐसे मामलों में नियामकीय व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन किस प्रकार किया जाए? यह प्रश्न अब केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे निजी विश्वविद्यालय नियमन तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बनता जा रहा है। फिलहाल इस विषय पर क्या कार्यवाही की जाती है? यह आगे चलकर स्पष्ट होगा।
टीप:- “इस समाचार से संबंधित समस्त दस्तावेज़ एवं अभिलेख RK NEWS 24 के पास उपलब्ध हैं।”





