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बिलासपुर (कोटा) : जहां एक ओर देश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर कानून लगातार सख्त किए जा रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर कई मामले ऐसे है जो वास्तविकता को उजागर कर व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के एक निजी विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ है।
क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिलान्तर्गत करगीरोड कोटा में स्थित डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय जहां पर कार्यरत एक महिला प्राध्यापक ने वर्ष 2021 में तत्कालीन डिस्टेंस डायरेक्टर अरविंद तिवारी (वर्तमान में प्रभारी कुलसचिव) तथा तत्कालीन कुल सचिव गौरव शुक्ला (दोनों आरोपित) पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। महिला ने सरकंडा थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उक्त दोनों अधिकारियों द्वारा उनसे वेतन के बदले शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया है। इस मामले में सरकंडा पुलिस ने जीरो में अपराध पंजीबद्ध कर केस डायरी अपराध थाना क्षेत्र कोटा भेज दिया जहां पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354(क) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत दोनों अधिकारियों के नाम अपराध दर्ज कर लिया। शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया प्रारंभ हुई, लेकिन मामला प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़ा होने के कारण अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। साथ ही दोनों आरोपितों को अग्रिम जमानत भी मिल गई, जिससे गिरफ्तारी नहीं हो सकी। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

अन्य शिकायतों का भी उल्लेख……
अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 2021 में ही एक अन्य महिला द्वारा भी संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना से जुड़ी शिकायत खरसिया थाना, जिला रायगढ़ में प्रस्तुत की गई थी, जिस पर रायगढ़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जांच के निर्देश जारी किए गए थे। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय में कार्यरत कुछ कर्मचारियों ने भी प्रभारी कुलसचिव अरविंद तिवारी के सेवा शर्तों, वेतन संबंधी मुद्दों एवं व्यवहार को लेकर छ.ग. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, श्रम कार्यालय तथा उच्च शिक्षा विभाग में शिकायतें प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है, जो संबंधित कार्यालय में विचाराधीन बताई गई हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया के बीच चर्चा तेज……
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर स्थायी नियुक्ति हेतु प्रक्रिया प्रस्तावित है। जिस पर साक्षात्कार भी होना है।उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, वर्तमान में प्रभारी कुलसचिव के रूप में कार्यरत अरविंद तिवारी भी इस पद के संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में, मामले के न्यायालय में लंबित होने और प्रशासनिक पद पर निरंतरता को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा देखी जा रही है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन का अंतिम निर्णय माननीय न्यायालय द्वारा स्पष्ट होगा।
जनता के बीच उठ रहे सवाल, महामहिम राज्यपाल के कार्यालय में लिखित में की गई शिकायत
ऐसी स्थिति में आम जनता के मन में सवालों का बढ़ना स्वाभाविक है। शिक्षा के मंदिर जैसे पवित्र क्षेत्र में यदि इस प्रकार के आरोपों के बावजूद अधिकारी वरिष्ठ पद पर बने रहते हैं, तो यह न केवल संस्थान की छवि को धूमिल करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गलत संदेश देता है। कुछ व्यक्तियों ने उपरोक्त बात की शिकायत महामहिम राज्यपाल के कार्यालय में लिखित रूप से किया है। मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की परीक्षा है। अब यह केवल एक शिकायत का विषय नहीं रहा, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा भी बन चुका है।अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित संस्थान के वरिष्ठ प्रबंधक इस विषय पर कोई ठोस कदम उठाते या फिर यह ऐसे ही सवालों के बोझ तले दबती रहेगी?
टीप:– उपरोक्त विषय से संबंधित समस्त दस्तावेज/अभिलेखRK News 24 के पास उपलब्ध है।





