
आष्टा: महिला आरक्षण बिल, जो लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है, इस बार भी संसद से पारित नहीं हो सका। इसके बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा है कि— “विपक्ष की असहमति और राजनीति के कारण यह अहम बिल पास नहीं हो पाया। सरकार महिलाओं को अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष सहयोग नहीं कर रहा।” सरकार के नेताओं का कहना है कि वे भविष्य में फिर से इस बिल को लाने की कोशिश करेंगे। वही इस पूरे सियासी बयान पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए निशाना साधा है।
अखिल भारतीय कांग्रेस सदस्य हरपाल ठाकुर ने कहा की लोकसभा में मोदी सरकार की महिला आरक्षण की आड़ में देश के संवैधानिक ढांचा बदलने की कोशिश नाकाम होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल शाम देश को संबोधित किया। उस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक के देश के प्रधानमंत्री में एक मात्र ऐसे प्रधानमंत्री है, जो देश के नाम संबोधन देने विपक्ष पर हमला करने के लिए आते है, जबकि देश के नाम संबोधन देश के 140 करोड लोगों को शामिल करने के लिए होता है और दुर्भाग्य प्रधानमंत्री मोदी उसे विपक्ष पर हमले के हथियार के रूप में उपयोग करते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए इस देश के लोगों को गुमराह करते हुए यह कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के दलों ने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया और उसको पास नहीं होने दिया जबकि हकीकत इसके विपरीत है महिला आरक्षण बिल देश की संसद के दोनों सदनों में 15 सितंबर 2023 को सर्व समिति से पास कर दिया गया है, तो फिर महिला आरक्षण का विरोध कैसे हुआ. हां महिला आरक्षण बिल की आड़ में मोदी सरकार मनमाने तरीके से परिसीमन कराने और बिना जनगणना किए अपने लाभ के लिए और राजनीतिक एजेंडा सेट करते हुए देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाना चाहते थे.
प्रधानमंत्री और भाजपा की इस कुटिल चाल को नेता विपक्ष राहुल गांधी जी एवं पूरे विपक्ष ने मिलकर नाकाम कर दिया और यह साबित कर दिया कि इस देश में किसी की भी सरकार को संविधान को कमजोर एवं संघीय ढांचे के साथ छेड़छाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। आपके सहयोगियों ने उस बिल में दो शर्तें जोड़ी जिसका उस समय कांग्रेस सहित विपक्ष ने विरोध किया शर्तें क्या थी की महिला आरक्षण जनगणना एवं कास्ट सेंसेज एवं परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। यदि आप चाहते तो यह शर्तें नहीं जोड़ते और यदि आपने वह शर्तें जोड़ भी दी थी तो 2 साल में उनको पूरा कर देते।
सीधे तौर पर विपक्ष ने केंद्र की सरकार पर महिलों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है। महिला आरक्षण बिल 15 सितंबर 2023 को संसद के अंदर सर्व सम्मति से पास हुआ और उसके ऊपर राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के हस्ताक्षर हो गए इसके बावजूद आपने 30 महीने तक उसको अधिसूचित नहीं किया गया. हरपाल ठाकुर ने वीडियो बयान जारी कर केंद्र सरकार को आड़े हाथों केते हुए कहाँ की कांग्रेस के शासनकाल में महिलों को उचित सम्मान और अधिकार मिला है ,जो भाजपा में देखने को नहीं मिलता।
फिलहाल महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर सहमति न बन पाना एक बार फिर राजनीति के टकराव को दिखाता है। सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में इस पर कोई ठोस रास्ता निकल पाएगा या यह मुद्दा यूं ही सियासत में उलझा रहेगा।





