
शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला छुरी कला के शाला प्रवेश उत्सव में 29 नव प्रवेशित छात्राओं का किया गया आत्मीय स्वागत…..
छुरीकला (कोरबा) : शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला, छुरीकला में मंगलवार को शाला प्रवेश उत्सव नगर पंचायत अध्यक्ष पद्मिनी देवांगन के मुख्य आतिथ्य में हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में प्रवेश लेने वाली 29 नवप्रवेशी छात्राओं का तिलक लगाकर एवं मिष्ठान खिलाकर स्वागत किया गया। उक्त कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष पद्मिनी देवांगन ने कहा कि “अनुशासन ही चरित्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। विद्यार्थियों को वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए नियमित अध्ययन और अनुशासित जीवन अपनाना चाहिए।” उन्होंने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि “कल कभी नहीं आता, इसलिए आज का कार्य आज ही पूरा करें। अनुशासन और चरित्रबल के सहारे ही जीवन में सफलता प्राप्त की जा सकती है।” मुख्य अतिथि ने शासन द्वारा प्रदत्त निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों एवं गणवेश का वितरण किया। साथ ही अपने निजी सहयोग से छात्राओं को कॉपी, पेन, कंपास सहित अन्य अध्ययन सामग्री भी भेंट की। संकुल प्राचार्य श्री मनोज सराफ ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने तथा मन लगाकर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। वहीं सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री हरिकृष्ण नायक ने शाला प्रवेश उत्सव की महत्ता एवं शासन की शिक्षा संबंधी योजनाओं की जानकारी देते हुए सभी बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का आह्वान किया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि श्री प्रीतम देवांगन, नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्री हीरानंद पंजवानी, पार्षद श्रीमती संगीता यादव, श्री जगराम यादव, श्री रमेश श्रीवास, श्री मुरारी सोनी, श्री लोकपाल राजपूत, श्री जगदीश सोनी, श्री हरिओम शर्मा, श्री फिरत पटेल, श्रीमती माया देवांगन, एसएमसी अध्यक्ष श्रीमती धन कुंवर, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, पालकगण एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आए हुए अतिथियों का आभार प्रदर्शन शाला के प्रधान पाठक विजय बाजपेई द्वारा किया गया।

नगर पंचायत अध्यक्ष ने न्यौता भोज में छात्राओं को परोसा भोजन, छात्राओं के बीच रहा आकर्षण और उत्साह का केंद्र
कार्यक्रम में नव प्रवेशित छात्राओं को न्यौता भोज कराया गया जिसमें नगर पंचायत अध्यक्ष पद्मिनी देवांगन ने अपने हाथों से छात्राओं को खीर, पूड़ी, दाल, चावल, सब्जी, अचार एवं पापड़ स्नेहपूर्वक परोसा। जो कि छात्राओं के लिए विशेष आकर्षण और उत्साह का केंद्र रहा।







