
बिलासपुर : जिले के करगीरोड कोटा स्थित डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय के बालक छात्रावास से छात्र को लापता हुए आज दस दिन पूरे होने के बाद भी छात्र का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। एकतरफ जहां परिजन अपने बच्चे के सकुशल वापसी के इंतजार में आश लगाए बैठे हुए है वहीं स्थानीय एवं जिला पुलिस प्रशासन की टीम भी छात्र के विषय में एक एक पहलू की बारीकी से जांच कर पता लगाने हेतु हर यथासंभव प्रयास कर रही है। एक ओर छात्र की गुमशुदगी ने जहां सभी को हैरानी में डाल दिया है वहीं यह मामला अब लोगों के बीच चर्चा का विषय भी बन गया है।
क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार रोहित कुमार (19 वर्ष), पिता अमनेंद्र कुमार, निवासी गया (बिहार), विश्वविद्यालय के बालक छात्रावास में रहकर बी फार्मेसी 4th सेमेस्टर में अध्ययन कर रहा था,जो 05 मार्च 2026 को छात्रावास से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता बताया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा उन्हें छात्र के लापता होने की जानकारी तत्काल न देकर 24 घंटे बाद दी गई। परिजनों ने यह भी बताया कि प्रारंभिक स्तर पर मामले की जानकारी सीमित दायरे में रखी गई। किंतु छात्र के गुमशुदगी की जानकारी कोटा पुलिस को मिलने के बाद मामले की जांच प्रारंभ की गई ,जिसमें प्रारंभिक जांच के दौरान सर्च डॉग की सहायता भी ली गई, जो छात्रावास परिसर से कोटा रेलवे स्टेशन की दिशा तक गया बताया जा रहा है।
पुलिस द्वारा आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है। हालांकि अब तक रास्ते में स्थित विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में छात्र की स्पष्ट उपस्थिति का कोई ठोस फुटेज मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सन 2018 की घटना एक बार फिर सुर्खियों में….
इसी बीच वर्ष 2018 की एक पुरानी घटना का भी विभिन्न चर्चाओं में उल्लेख किया जा रहा है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार 12 मई 2018 को सकरी पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति द्वारा सूचना दर्ज कराई गई थी कि उसके पुत्र का शव एक कार के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मर्ग क्रमांक 24/18 कायम कर वैधानिक जांच प्रारंभ की थी।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि जिस वाहन से शव बरामद हुआ था, वह उस समय विश्वविद्यालय से जुड़े एक अधिकारी के उपयोग से संबंधित बताया गया था। पुलिस द्वारा उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ किया गया था तथा घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई थी। उस समय साक्ष्य से जुड़े कुछ पहलुओं के आधार पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई भी की गई थी और उन्हें न्यायालय के आदेश पर कुछ समय के लिए न्यायिक हिरासत में रखा गया था।
बाद में यह मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन रहा, जहां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्ति को दोषमुक्त कर दिया गया था। वर्तमान में संबंधित व्यक्ति विश्वविद्यालय में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर अपनी सेवा दे रहे है।
दो अलग-अलग समय में सामने आई इन घटनाओं को लेकर अब स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठने लगे हैं। वर्ष 2018 में सामने आई संदिग्ध मौत की घटना और अब छात्रावास से छात्र के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से ऐसे परिसरों में निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इस पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
हालांकि इन सभी सवालों के स्पष्ट उत्तर पुलिस जांच और संबंधित प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल छात्र की तलाश और मामले की जांच जारी है।
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