
बिलासपुर: जिले के करगीरोड कोटा स्थित डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय से एक बेहद चिंताजनक और संदिग्ध मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के बालक छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाला बी. फार्मेसी का एक छात्र रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया है। घटना के बाद से विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर न केवल लापरवाही बल्कि गुमराह करने एवं दुर्व्यवहार कर मारपीट करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि छात्र के लापता होने के छह दिन बाद भी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट परिजन अब बिलासपुर स्थित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार बिहार के गया जिला निवासी अमरेंद्र कुमार का 19 वर्षीय पुत्र रोहित कुमार करगीरोड कोटा स्थित डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय में बी. फार्मेसी चौथे सेमेस्टर का छात्र है जो विश्वविद्यालय के बालक छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिजनों के मुताबिक रोहित 5 मार्च 2026 से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता है।परिवार का आरोप है कि छात्र के लापता होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें समय पर इसकी सूचना नहीं दी। जब परिजनों ने स्वयं फोन के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की तो रोहित का मोबाइल बंद मिला। लगभग 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद 6 मार्च की रात करीब 10:30 बजे छात्रावास प्रबंधन की ओर से परिवार को उसके लापता होने की जानकारी दी गई। परिजनों का कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद प्रबंधन की ओर से कोई भी तत्परता नहीं दिखाई गई, जिससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। परिजनों के अनुसार जब वे विश्वविद्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि रोहित रात के समय विश्वविद्यालय परिसर के पीछे स्थित बाउंड्रीवॉल से कूदकर कहीं चला गया है। जब परिवार ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखाने की मांग की तो पता चला कि छात्रावास परिसर में कोई भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। पास स्थित फार्मेसी भवन में एक कैमरा जरूर दिखाई दिया, लेकिन उसमें भी छात्र से संबंधित कोई गतिविधि रिकॉर्ड नहीं मिली।परिवार ने आगे बताया कि जब उन्हें सीसीटीवी से कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने रोहित के सहपाठियों से संपर्क किया। इस दौरान कुछ छात्रों ने बताया कि एक माह पहले रोहित का विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले पंकज नाम के एक छात्र से करीब पांच हजार रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद के दौरान मारपीट की घटना भी सामने आई थी, लेकिन छात्रावास अधीक्षक मुकेश पांडेय ने मामले को आपस में समझौता कर सुलझा दिया था। परिवार का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया और न ही इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।
.प्रबंधन द्वारा पहले किया गया गुमराह, बाद में क्षेत्रवाद की बात कर किया दुर्व्यवहार
लापता छात्र के चाचा निखिल कुमार निवासी गया बिहार ने बताया कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहले कई प्रकार के जांच का झूठा आश्वासन देकर हमें गुमराह करते हुए पुलिस और मीडिया के पास जाने से रोका गया। लगातार समय निकलने से घबराए जब हम कोटा पुलिस के पास पहुंचे और डॉग स्क्वायर्ड की टीम ने जांच प्रारंभ किया तब प्रबंधन के कुछ कर्मचारियों द्वारा परिजनों से तुम सब बिहारी हो जैसे क्षेत्रवादी बात एवं शब्दों का प्रयोग कर न केवल दुर्व्यवहार किया बल्कि मारपीट भी किया।
परिजनों का आरोप ” मौका ए वारदात के दिन छात्रावास उपस्थिति पंजी में छात्र का नाम अंकित किंतु हस्ताक्षर फर्जी”….
पीड़ित पिता अमरेंद्र कुमार का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र की उपस्थिति और अनुपस्थिति को लेकर भी स्पष्ट जानकारी देने से बच रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि 5 मार्च के उपस्थिति रजिस्टर में रोहित के नाम के सामने किए गए हस्ताक्षर फर्जी हो सकते हैं। इस संबंध में उन्होंने हस्तलेखन विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही छात्र के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कराने की भी मांग की गई है, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
मां के नाम एक संदेश जो छात्र के मां को मिला ही नहीं – “मां चिंता मत करना, मैं जल्दी लौटूंगा। अभी जाना जरूरी है, नहीं तो मुझे यहां जीने नहीं देंगे।”
परिजनों के मुताबिक छात्रावास से रोहित का मोबाइल फोन बरामद हुआ है। मोबाइल में उसकी ओर से अपनी मां को एक संदेश लिखा मिला, जिसमें उसने लिखा था कि “मां चिंता मत करना, मैं जल्दी लौटूंगा। अभी जाना जरूरी है, नहीं तो यहां मुझे जीने नहीं देंगे।” हालांकि जांच के दौरान पता चला कि जब यह संदेश लिखा गया था तब मोबाइल में सिम कार्ड मौजूद नहीं था, जिसके कारण वह संदेश मां तक पहुंचा ही नहीं। इस तथ्य ने परिजनों की आशंका को और बढ़ा दिया है कि कहीं छात्र के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हुई है।
विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रा भी है अध्ययनरत, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़े हुए कई सवाल
इसी बीच विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार इसी वर्ष नेपाल और भूटान से लगभग 15 से 20 छात्राएं भी विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए आयें हैं, जिन्हें फैकल्टी निवास के भवन को अस्थाई कन्या छात्रावास बनाकर रखा गया है। ऐसे में इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस विषय में कोटा थाना प्रभारी से हमारे संवाददाता द्वारा चर्चा किए जाने पर उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत दयनीय है इतने बड़े विश्वविद्यालय के छात्रावास और उसके आसपास के अत्यंत संवेदनशील स्थान में किसी भी तरह की मानक सुरक्षा का इंतजाम न होना बहुत ही चिंतनीय है इस विषय में थाना प्रभारी द्वारा विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस भी दिया गया है।
छात्रावास में रहने वाला कोई छात्र कई दिनों तक लापता रहता है और प्रशासन इसकी स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ रहता है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि सब कुछ सामान्य है तो फिर सीसीटीवी फुटेज और अन्य आवश्यक जानकारी परिजनों को दिखाने में संकोच क्यों किया जा रहा है? फिलहाल पीड़ित परिवार अपने बेटे की सुरक्षित बरामदगी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद में न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।

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