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करगीरोड, (बिलासपुर) : करगीरोड (बिलासपुर): एक 19 साल का युवा छात्र जो आंखों में सपने, दिल में उम्मीदें और भविष्य संवारने की चाह लेकर घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पढ़ने आया। परिवार ने भरोसा किया कि जहां उसका बेटा पढ़ रहा है, वहां उसका भविष्य सुरक्षित है। लेकिन आज वही परिवार एक ऐसे सवाल के साथ जी रहा है, जिसका जवाब न तो प्रबंधन दे पा रहा है न ही पुलिस प्रशासन।
“आखिर रोहित गया तो गया कहाँ ?”
जी हां! हम बात कर रहे है एक माह पूर्व डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय करगीरोड कोटा के छात्रावास से रहस्यमय तरीके से लापता हुए छात्र रोहित कुमार की। 19 वर्षीय छात्र रोहित कुमार, पिता अमरेंद्र कुमार, निवासी गया (बिहार), जो डॉ. सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय, करगीरोड कोटा के बालक छात्रावास में रहकर बी. फार्मेसी 4th सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा था और 06 मार्च 2026 को वह अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में छात्रावास से लापता हो गया। जिसे लापता हुए आज, एक महीना बीत चुका है लेकिन अब तक न तो रोहित मिला है और न ही उसके गायब होने का कोई सुराग। न तो कोई ठोस जवाब और न ही कोई जानकारी। ऐसे में अगर कुछ मिल ही रहा है तो वो है सिर्फ इंतजार।

रोहित की गुमशुदगी, परिजनों के तमाम सवाल किंतु जवाब किसी के पास नहीं
24 घंटे की चुप्पी, सबसे बड़ा सवाल….
परिजनों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने रोहित के लापता होने की सूचना तुरंत नहीं, बल्कि 24 घंटे के बाद दी। साथ ही परिजनों के आने पर प्रबंधन ने उन्हें बार बार इस मामले को गुप्त रखने हेतु कहा। जबकि गुमशुदगी के मामलों में शुरुआती 24 घंटे सबसे अहम माने जाते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही है? या फिर उस समय में कुछ ऐसा छूट गया, जो आज तक नहीं मिल पाया? कहीं यही वो वक्त तो नहीं था, जो रोहित तक पहुंचने की आखिरी उम्मीद बन सकता था?

पुलिस की जांच जारी लेकिन नतीजा अब तक शून्य…..
परिजनों ने बताया कि मामले की शिकायत करते ही तुरंत स्थानीय पुलिस हरकत में आई, सर्च डॉग बुलाए गए, छात्रावास से रेलवे स्टेशन तक ट्रैकिंग भी की गई, आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच हुई, लेकिन नतीजा सिर्फ शून्य ही रहा। तब से लेकर अब तक पुलिस के हाथों एक भी ठोस फुटेज नहीं है, और न ही रोहित की मौजूदगी की कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। इससे सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या रोहित सच में उस दिशा में गया था जहां पुलिस जांच कर रही है, या फिर जांच की दिशा ही बदल गई है ? फिलहाल इस पर कुछ कह पाना मुश्किल है।

छात्रावास से बरामद मोबाइल जिसमें छिपे कई अनसुलझे सवाल…
प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच के दौरान पुलिस को रोहित का मोबाइल छात्रावास में ही मिला। जिसमें सिम कार्ड नहीं था साथ ही उस मोबाइल से रोहित की मां के मोबाइल नंबर में एक मैसेज भी गया है जिसमें रोहित मां से कह रहा है कि ” मां! चिंता मत करना जल्दी लौटूंगा, अभी जाना जरूरी है, यहां रहा तो जी नहीं पाऊंगा”। लेकिन हैरत की बात यह है कि यह मैसेज मां तक पहुंचा ही नहीं है क्योंकि सिम न होने की वजह से वह मैसेज अनसेंड हो गया है। यह सब बात अपने आप में कई अनकहे सवाल खड़ा करता है साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि “रोहित को ऑनलाइन गेमिंग की आदत थी और उसके मोबाइल में लाखों रुपए के लेनदेन के संकेत मिले हैं।”अब सवाल यह है कि अगर रोहित ने मां को मैसेज किया तो सिम निकालकर ही क्यों किया ? कहीं ऐसा तो नहीं कि यह एंगल इस गुमशुदगी से जुड़ा है ? या फिर यह भी जांच को भटकाने का एक रास्ता ही है ? वहीं यदि कोई छात्र विश्वविद्यालय परिसर में रहकर लाखों रूपये की लेनदेन कर रहा है और इसकी भनक किसी को नहीं है तो क्या यह विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुशासन व्यवस्था की नाकामी नहीं है?
परिवार की हालत ,शब्दों से परे दर्द…..
इस पूरे मामले में अगर सबसे ज्यादा कोई टूटा है तो वह है रोहित का परिवार। एक मां, जिसकी नजर आज भी दरवाजे पर टिकी है कि शायद अगली दस्तक उसके बेटे की हो? एक पिता जो हर फोन कॉल पर चौंक जाता है कि शायद इस बार कोई अच्छी खबर हो लेकिन हर बार उम्मीद टूट जाती है और हाथ लगती है तो सिर्फ और सिर्फ निराशा।इस विषय में गया निवासी रोहित के चाचा निखिल कुमार बताते हैं कि “रोहित के गुमशुदगी की खबर मिलते ही हम सब दूसरे ही दिन कोटा पहुंच गए। तब शिकायत करने पर स्थानीय पुलिस जांच कर रही थी 5 दिन बाद भी जब कोई परिणाम नहीं निकला तब हमने एसपी कार्यालय में जाकर ज्ञापन दिया। इस बीच हमनें 15 दिनों तक कभी करगीरोड कोटा तो कभी बिलासपुर में रहकर अपने स्तर पर रोहित के बारे में पता लगाने का हर संभव प्रयास किया और जानकारी प्राप्त करने हेतु बने रहे। लेकिन आर्थिक तंगी, अजनबी शहर और लगातार मिल रहे नकारात्मक जवाब ने हमें वहां से लौटने पर मजबूर कर दिया और हम लौट आए।”इस बात से स्पष्ट है कि यहां पर एक परिवार अपने बेटे को ढूंढने के लिए भी मजबूरी में पीछे हट जाए इससे बड़ा दर्द क्या हो सकता है?

तकनीक के दौर में भी लाचार सिस्टम……
आज का दौर डिजिटल है जहां पर मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी, ऑनलाइन ट्रैकिंग सब कुछ मौजूद है। फिर भी एक 19 साल का छात्र एक महीने तक बिना किसी सुराग के गायब रहता है क्या यह केवल संयोग है या फिर सिस्टम की गंभीर विफलता का दृश्य?
आखिर जवाबदेही किसकी ?
अब इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो चुके हैं-
* 24 घंटे तक सूचना क्यों रोकी गई?
* क्या शुरुआती जांच में चूक हुई?
* सीसीटीवी और तकनीक के बावजूद कोई सुराग क्यों नहीं मिला?
* क्या जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है?
और अंत में फिर वही सवाल जो हर किसी के दिल में है कि एक माह बीत गए ,सैकड़ों सवाल उठ रहे है “आखिर रोहित कुमार गया तो गया कहाँ? जिसका जवाब अब तक शून्य है।
अब यह मामला सिर्फ एक गुमशुदगी का नहीं बल्कि एक परिवार की टूटती उम्मीदों, और सिस्टम की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा आईना तब तक बना रहेगा जब तक रोहित कुमार का पता मिल नहीं जाता ।
RK NEWS 24 की रिपोर्ट……….





