
जांजगीर-चांपा :-सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े एक मामले ने जिले के शिक्षा तंत्र में हलचल मचा दी है। पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल जांजगीर-चांपा जिले के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा के दो अलग-अलग बयानों को लेकर खड़ा हो गया है, जिससे मामला संदेह के घेरे में आ गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिला निवासी आवेदक को सूचना मिली कि जांजगीर-चांपा जिला शिक्षा मुख्यालय अंतर्गत विद्यालय में पदस्थ एक टीचर द्वारा कथित रूप से कूट रचना कर फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी प्राप्त की गई है। इस संदेह के आधार पर जन हित को ध्यान में रखते हुए आवेदक द्वारा 18 अक्टूबर 2025 को “सूचना के अधिकार अधिनियम 2005” के तहत आवेदन प्रस्तुत कर संबंधित विद्यालय के समस्त टीचर्स की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों की मांग की गई। प्रारंभिक स्तर पर जिला शिक्षा कार्यालय के जन सूचना अधिकारी द्वारा जानकारी देने में टालमटोल की गई। किंतु मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी (स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा) तक पहुंचने पर स्पष्ट आदेश जारी हुआ कि 7 दिवस के भीतर समस्त जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। आदेश के बाद विद्यालय प्राचार्य द्वारा अधिकांश दस्तावेज उपलब्ध भी करा दिए गए। हालांकि, इसी दौरान संबंधित टीचर द्वारा लिखित आपत्ति प्रस्तुत कर अपनी स्नातकोत्तर (M.Sc.) पूर्व वर्ष की अंकसूची को निजी जानकारी बता आवेदक को उपलब्ध कराने से मना कर दिया गया, जबकि उसी टीचर द्वारा स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की अंकसूची आवेदक को दिया जा चुका है। जिससे मामले की संदिग्धता और बढ़ गई।
एक ही मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी के दो अलग अलग बयान

मामले की जानकारी हाथ लगने पर RK News 24 मीडिया चैनल के संवाददाता ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर मामले के बारे पड़ताल किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। तथ्य यह कि पहले, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पत्र जारी कर समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। बाद में उनका बयान सामने आया कि“अंकसूची निजी संपत्ति है, अतः इसे प्रदान नहीं किया जा सकता।” इस प्रकार एक ही मामले में दो अलग बयान ने मामले को संदेह में डालते हुए कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। क्या नियमों की अलग-अलग व्याख्या की जा रही है? या फिर किसी स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास हो रहा है ? फिलहाल यह जांच का विषय बन गया है।

फर्जी डिग्री का कनेक्शन छत्तीसगढ़ के एक निजी विश्वविद्यालय से, जिसके ऊपर पूर्व में भी लग चुके है फर्जी डिग्री जारी करने के आरोप
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में छत्तीसगढ़ के एक नामी निजी विश्वविद्यालय का नाम भी जुड़ा हुआ है जो सामने निकल कर आ रहा है। उक्त विश्वविद्यालय जिस पर पूर्व में भी कथित रूप से पैसा लेकर फर्जी डिग्री जारी करने के आरोप लग चुका हैं। साथ ही आवेदक का दावा है कि उक्त टीचर की डिग्री में कथित अनियमितता की जानकारी मिलने के बाद RTI आवेदन किया गया, जिला शिक्षा विभाग द्वारा प्रारंभ में टालमटोल की गई साथ ही अपील के बाद भी अधूरी जानकारी दी गई है, अंततः संबंधित दस्तावेज (स्नातकोत्तर पूर्व वर्ष की अंकसूची) रोके जाने से मामले में रुकावट की स्थिति बनी हुई है। इन सभी घटनाक्रमों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या कहता है RTI कानून?
विशेषज्ञों के अनुसार, शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज,जैसे – अंकसूची, डिग्री आदि यदि किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के पास उपलब्ध हैं, तो वे “सूचना” की श्रेणी में आते हैं और जनहित में साझा किए जा सकते हैं।
आगे क्या होगा ?
यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका असर न केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है ? जिला प्रशासन क्या संबंधित मामले में स्पष्टीकरण देता है या फिर निष्पक्ष जांच के आदेश जारी करता है? फिलहाल यह आगे चलकर स्पष्ट होगा।
टीप:- उपरोक्त समाचार से संबंधित समस्त प्रमाणित दस्तावेज “RK NEWS 24 के पास उपलब्ध है।






